भारतवर्ष के सम्राट हिंदूपदपातशहा श्रीमंत छत्रपती शाहू महाराज...
भारतवर्ष के सम्राट हिंदूपदपातशहा श्रीमंत छत्रपती शाहू महाराज...
वर्धिष्णुर्विक्रमे विष्णोः |
सा मूर्तिरिव वामनी | शंभूसुतोरिव |
मुद्रा शिवराजस्य राजते ||
- श्रीशाहूछत्रपति (पहिले)
अर्थात : विष्णूरुपी वामन'की उत्तरोत्तर बढनेवाली प्रतिकृती की तरह शंभूराजाजी के पुत्र शिवाजी (शाहू) महाराज की मुद्रा राज्य (राज्यविस्तार) करें |![]() |
| छत्रपती शाहू महाराज (पहिले) |
स्वराज्य के दुसरे छत्रपती संभाजी महाराज के पुत्र शाहू राजा का जन्म १८ मे १६८२ में हुवां | ११ मार्च १६८९ में छत्रपती संभाजी महाराज की बड़े हि क्रुरता सें औरंगजेब ने हत्या की | संभाजी राजा कें मौत के बाद "स्वराज्य" उच्चाटन के संतुष्टी की डकार लेने के लिये राजधानी रायगड पर हमला कियां | स्वराज्य कि ध्वजा अबाधित रहें इस लिये महाराणी येसूबाई (संभाजीपत्नी) जी नें अपने देवर छत्रपती राजाराम जी की जान बचायी और खुद एक संधी के तहत अपने ७ साल कें पुत्र को ले औरंगजेब की कैद स्विकार कीं |
१७ साल की कैद में राजमाता येसूबाईने शाहूजी को सब गलत चिजों से दूर रखा, उनपर अच्छे संस्कार कियें, उन्हे मराठा तेहजीब सिखाई | और इन्ही चिजों का इस्तमाल करते हुवें छत्रपती होने के बाद शाहूजीनें एक आदर्श राज्य स्थापन कियां | कैद से लौटते हि शाहू महाराज नें अपनी सेना जुटाने की तैयारी शुरु कीं | स्वराज्य कें बडे बडे असामी खूद की तरफ मोड लियें | अपना राज्य स्थिर होता देख शाहू महाराज सातारा (अजिंक्यतारा) किलेपर खुद को अभिषिक्त कर छत्रपती बन गयें |
छत्रपती होते ही शाहू महाराज ने राज्यविस्तार पर ध्यान दियां | उनके दादाजी छत्रपती शिवाजी महाराज नें स्थापन कियें और पिता छत्रपती संभाजी महाराज नें बढायें तथा चाचा छत्रपती राजाराम और चाची ताराबाई सरकार ने जान कि बाजी लगा कर बचाये हुयें, हजारो मराठा मावलों के पराक्रमी रक्त से लिखे गये "स्वराज्य" का "मराठा साम्राज्य" में रुपांतरण छत्रपती शाहू नें अपनी अतुलनीय बुद्धी एवं बल से कियां | शाहू महाराज नें १७१८ में ३५ हजार कें सेना के साथ अपने सरसेनापती खंडेराव दाभाडे कों दिल्ली जितने भेजा | सरसेनापती ने दिल्ली जीत कर बादशहा को गद्दी से हटां शाहूजी कें पसंद का बादशहा गद्दी पर बिठायां | "१७ साल कैद में रहा एक बच्चा ताउर्म सल्तनत का गुलाम हि रह जायेगा" ऐसी सोच रख शाहू महाराज को रिहां करने वाले मुघल बादशहा आजम के वंशज फारुक सियार को उसी शाहू महाराज जी ने "मयुरसिंहासन" से लाथ मार कर उठा दिल्ली को अपना दास बनां लियां |
'शाहू महाराज एक उत्तम प्रशासक थे' इस चिज की गवाही इतिहास का हर एक पन्ना देता हैं | ४२ साल तक उन्होंनें संपूर्ण भारतवर्ष पर राज्य कियां | उत्तम प्रशासन कें हेतू उन्होंनें हर १०० मील पर एक चौकी बिठा रखी थी | गुजरात में गायकवाड तथा दाभाडे, उत्तर में पवार, होळकर, शिंदे (सिंधिया), बंगाल-उडीसा जैसे पुर्व में नागपूरकर भोसले, दख्खन में फत्तेसिंह भोसले और पश्चिमी समुंदर में आंग्रे जैसे शूरवीर सरदारों कें रुप में राज्य के अभेद्य तट बनायें | अनेको मराठा घरानों की तलवारों ने छत्रपती शाहू कें कार्यकाल में प्रसिद्धी पाई | महाराष्ट्र कें हर गांव मे सरदार और हर घर में वीर सैनिक नें जन्म लियां | शाहूकाल में मराठा वीरोंने अटक (अफगाणिस्तान) से लेकर कटक (बंगाल) तक पूरे हिंदूस्थानपर अपना जरीपटका (शाही ध्वज) लेहराया | दिल्ली पर राज करनें वाले शाहू आखरी हिंदू सम्राट थें | इतना ही नहीं युरोप का प्रवेशद्वार कहे जाने वाले इस्तंबूल शहर पर भगवा लहराने की उनकी मनशा थी |
छत्रपती शाहू कें रुप में मराठोंको देवगिरी यादवों के बाद एक स्थिर शासन प्राप्त हुवां | इसी के चलते १७२१ में शाहूराजानें शाहूनगर अर्थात "सातारा" इस मराठा रचित पहले सुनियोजित (well planned) नगर की स्थापना की | और पहली बार मराठों की राजधानी किले (दुर्ग) सें जमिन पर आयी | छत्रपती शाहू एक जिंदादील व्यक्तीमत्व थें | शुरुवात में उनके राज्यारोहन को विरोध करने वाली उनकी चाची महाराणी ताराबाई ने मराठो की दुसरी गद्दी कोल्हापूर में स्थापन कीं | लेकीन शाहू महाराज ने उनके प्रती मन में कोई मलीनता ना रखते हुवें, हर वक्त कोल्हापूर गद्दी के प्रती बडे भाई की भुमिका निभायी | कोल्हापूर में हूवे सत्तापरीवर्तन के बाद अजिवन ताराबाई को अपनी माँ के तरह रख उनकी सुश्रुषा की | अपने सरदारोंके प्रती उनकी भुमिका हमेशा सौदार्य एवं कुटुंबप्रमुख जैसी रहीं | इस बात का सबुत बाजीराव-मस्तानी इस पेशवा कें अंतर्गत प्रकरण में मिलता है | बाजीराव का पक्ष लेते हुए चिमाजी अप्पा को लिखे पत्र में "रायास कोणे एकी बिलकुल खट्टे न करणे.." अर्थात बाजिराव को कोई तकलिफ ना दि जायें ऐसा फर्मान जारी कियां | कोई मोहिम जितनेपर वे अपने सरदारोकीं सराहना करते और कोई गलत काम करने पर उन्हे दंडीत भी करते थे |
छत्रपती शाहू महाराज ने नयी इमारते एवं मंदिरोंकी रचना की और अपने सरदारोंको भी इस लिये उद्युक्त कियां | सातारा कें पास लिंब गांव में तरह तरह के नस्ल कें आम की पैदावार करवायीं | उन्हे अलग अलग नस्ल कें कुत्ते एवं हाथी, घोडे पालने का शौक था | अपने राज्य में उन्होंनें हर कला को चालना दी | व्यापार बढाने के लिये साहुकारोकों अभयदान दियां | कुछ अभ्यासकों की मानें छत्रपती शाहू राजा नें उनके आखरी कुछ साल राजविलास भोग को छोड़ सन्यस्त जिवन व्यतित कियां |
सातारा में बैठ आलम हिंदोस्थान पर राज्य करने वाले, पराक्रमी, प्रजाहितदक्ष एवं सहृदय छत्रपती शाहू महाराज निर्विवाद एक आदर्श सम्राट थें |
#रणमस्तबहाद्दर

Ek No ⚡
ReplyDeleteBahut khubsurat, bahut gyaanvardhak, itne gauravshaali itihaas ko hindi me likhne ke liye shukriya!!
ReplyDeleteमानाचा मुजरा महाराज..
ReplyDeleteMast👌👌👌🙏🏼🙏🏼🙏🏼
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